
विधा – कविता
श्रेणी – जीवन
मौलिक रचना
रचनाकार – कौशल
जीवन एक सफ़र है प्यारा, हर पल इसका रूप निराला,
कभी सूरज-सी तपन मिले तो, कभी घटा का मीठा छाला।
कभी हवा बन छू ले खुशियाँ, कभी दर्द का बादल छा जाए,
कभी मोहब्बत फूल खिलाए, कभी विरह का कांटा चुभ जाए।
कभी राह में कांटे मिलते, कभी चंदन-सी महक दिखे,
कभी अंधेरों से लड़ना पड़ता, कभी उजाला साथ बहकें।
कभी गिरा तो उठना सीखो, यही जीवन का सार रहेगा,
डर से लड़कर आगे बढ़ना, यही असली आधार रहेगा।
कभी सपनों को पंख लगाओ, कभी मन को मत रोने दो,
कभी कठिनाइयों संग हँसना, कभी उम्मीदें खोने दो।
चलते-चलते हम सीखते हैं, हर पल का एक नया सबक,
जीवन की इस महफ़िल में बस, रखो सदा हिम्मत का फलक।
कौशल












