विषय – राजभोज
विधा- कविता
हे राजभोज,
कुल शिरोमणि हो आप हमारे।
तुम्हारी जय-जयकार हो,
हम नित समय तुम्हें पुकारे।।
तुम्हारे दरबार में ,
नित ज्ञान की गंगा बहती ।
ऋषि-मुनियों के सहयोग से,
आप की सभा आनंद- उमंग से चलती।।
धधकती आग सी,
तुम्हारा कार्य में तेज है।
हमारी दिल की,
यह पुकार है।।
आप के डमरू के नाद से,
आसमान गूंजता है।
ओंकार का उतघोष,
चारों ओर होता है।।
आप के शासन काल में,
न्याय का राज था।
प्रजा की रक्षा करना,
आप का मुख्य काज था ।।
ज्ञान-विज्ञान , आप की पहचान है,
कला-साहित्य, आपका सम्मान है ।
।।राजभोज की जय।।
रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्य.शिक्षक) शास. उच्च. माध्य. विद्यालय बकोडी, ब्लॉक कुरई ,जिला सिवनी (म.प्र.)












