बच्चों की दुनिया निराली है,
जहाँ से नहीं उन्हें लेना देना।
नित खाते पीते उछलते कूदते,
वो रहते अपनी मौज मस्ती में है।।
यह खेल खेल में सब सीखते,
त्याग, समर्पण एवं प्रेम भावना।
सदैव हाथ से हाथ मिलाकर चलते,
यह नित साथ रखते है मानवता।।
मन्नू बचपन इनका खो रहा है,
यह बस्ते का भार ढो रहा है।
संस्कारो का यूं पतन हो रहा है,
यह मोबाइल मे व्यस्त हो रहा है।।
कुछ खेलते कबड्डी कुछ फेंकते भाले है,
यह हमारे भारत के शेर मतवाले है।
लोभ झूठ फ़रेब से रहते कोशौ दूर है,
तभी धरा के वो भगवान कहे जाते है।।
वफादारी के सच्चे प्रतीक है यह,
डरना झुकना इनका काम नहीं।
साहस शौर्य इनके रक्त में बहता,
गुलामी सहना इनका नाम नहीं।।
मुन्ना राम मेघवाल।
कोलिया, डीडवाना,राजस्थान।












