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जिंदगी का सार बस प्यार है


सृष्टि ने किया यह स्वीकार है ,
जिंदगी का सार बस प्यार है ।
बिन प्यार जीवन यह कचड़ा ,
प्यार का दुश्मन अहंकार है ।।
रत्नों में बहुमूल्य होता हीरा ,
पर हीरा मिथ्या जीवन हार है।
हीरा रखते मानव से ही पृथक ,
हीरा मानव जीवन अंधकार है ।।
हीरा रख हम अमीर कहलाते ,
हीरा देता मन को अहंकार है ।
भूल से जिसने एक बार चाटा ,
तत्काल ही जीवन बेड़ा पार है।।
हीरा ढूॅंढ़ते हम बन रहे हैं हीरा ,
हीरा दुश्मन रूप में तैयार है ।
समझ रहे हैं हीरा होता जहर ,
फिर भी हीरा ही बनता यार है ।।
हृदय से पूछा हमने हीरा हेतु ,
जिसपे हृदय देता न उद्गार है ।
हीरा दे जीवन को अहंकार ,
अहंकार ईश्वर का आहार है ।।
जीवन का प्यारा प्यार होता ,
प्यार हॅंसता जीवन आधार है ।
प्यार जीवन का कीमती हार ,
जिंदगी का सार बस प्यार है ।।
पूर्णतः मौलिक एवं
अप्रकाशित रचना
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।

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