सोलह कला अवतार भगवान श्री कृष्ण सम्पूर्ण परब्रह्म हैं – कल्पकथा परिवार
प्रभु श्री राधा गोपीनाथ जी महाराज की कृपा से संचालित राष्ट्र प्रथम, हिन्दी भाषा, सनातन संस्कृति, एवं सद साहित्य हेतु कृत संकल्पित कल्पकथा साहित्य संस्था परिवार की संवाद प्रभारी श्रीमती ज्योति राघव सिंह ने बताया कि कल्पकथा परिवार की २३०वीं साप्ताहिक ऑनलाइन काव्यगोष्ठी भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं को समर्पित रही।
देश - विदेश से जुड़े विद्वान सृजनकारों के साप्ताहिक आयोजन की अध्यक्षता हल्द्वानी उत्तराखण्ड से जुड़े प्रबुद्ध साहित्यकार गोपाल कृष्ण बागी ने की जबकि उत्तरकाशी उत्तराखण्ड से जुड़ीं विद्वत रचनाकार डॉ अंजू सेमवाल ने मुख्य आतिथ्य का पद भार सम्हाला।
भास्कर सिंह माणिक के मंच संचालन में पांच घंटे से अधिक समय चले कार्यक्रम का शुभारंभ नागपुर महाराष्ट्र से जुड़े वरिष्ठ साहित्यकार विजय रघुनाथराव डांगे द्वारा संगीतमय गुरु वंदना, गणेश वंदना, एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ जिसमें प्रेम कवि, पद्म श्री, पद्म भूषण, शिक्षाविद् स्वर्गीय गोपालदास सक्सेना नीरज जी को श्रद्धांजलि दी गई।
कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति आई सीवान बिहार के वरिष्ठ साहित्यकार बिनोद कुमार पाण्डेय जी द्वारा उसके बाद तो मानों संध्या भक्ति रंगों से सराबोर होने लगी। अमित पण्डा अमिट रोशनाई, विजय रघुनाथराव डांगे, किरण अग्रवाल, नन्द किशोर बहुखंडी, ज्योति प्यासी, कविता जैन कुहक, दुर्गादत्त मिश्र बाबा जी, डॉ श्याम बिहारी मिश्र, आनंदी नौटियाल अमृता, सुनील कुमार खुराना, सांद्रा लुटावन गणेश, प्रमोद पटले, डॉ अंजू सेमवाल, गोपाल कृष्ण बागी, भास्कर सिंह माणिक, दीदी राधा श्री शर्मा, एवं पवनेश मिश्र ने काव्य पाठ किया।
भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित मंत्रमुग्ध करती रचनाओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए कार्यक्रम अध्यक्ष गोपाल कृष्ण बागी जी ने कहा कि “भगवान श्री कृष्ण ने बालपन से ही राक्षसों का अंत करने की शुरुआत करते हुए शक्ति का प्रयोग सज्जनों और सत्य की रक्षा के लिए करने का संदेश दिया। वहीं डॉ अंजू सेमवाल ने सहभागी साहित्यकारों की प्रशंसा करते हुए आयोजन को सफल बताया।
आमंत्रित अतिथियों, सहभागी साहित्यकारों, एवं दर्शकों का आभार प्रकट करते हुए कल्पकथा संस्थापक दीदी श्रीमती राधा श्री शर्मा ने कहा कि सोलह कला संपन्न अवतार भगवान श्री कृष्ण सम्पूर्ण परब्रह्म हैं जिन्होंने अपने आचरण से समाज प्रत्येक परिस्थिति में संघर्ष और शक्ति के सदुपयोग की अनुशंसा की।
कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रगीत वन्दे मातरम् स्मरणोत्सव १५०वें वर्ष में अमर बलिदानियों एवं स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करते हुए वन्दे मातरम् गायन किया तत्पश्चात सर्वे भवन्तु सुखिन: शांति पाठ के साथ कार्यक्रम को विश्राम दिया गया।












