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विद्यावाचस्पति उपाधि प्राप्ति पर कृतज्ञता–अर्पण

‘विद्यावाचस्पति’ उपाधि प्राप्ति के सुअवसर पर आज मेरे जीवन का यह क्षण अत्यन्त गौरव, कृतज्ञता और आत्मिक विनय से परिपूर्ण है। आज प्राप्त हुई ‘विद्यावाचस्पति’ की उपाधि केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि मेरे साधना–पथ, साहित्य–यात्रा और जीवन–अनुशासन की मौन स्वीकृति है। यह उपाधि मेरी नहीं, उन सभी पुण्य आत्माओं की है जिनके स्नेह, विश्वास और आशीर्वाद से मेरी कलम को दिशा मिली, शब्दों को अर्थ मिला और विचारों को आकाश प्राप्त हुआ।

परमपिता परमात्मा के चरणों में सादर नमन करते हुए, मैं अपने जीवन–प्रेरक एवं मार्गदर्शक परमश्रद्धेय डॉ. प्रेम रावत जी (अंतर्राष्ट्रीय वक्ता और शांति शिक्षक) के श्रीचरणों में अपना सम्पूर्ण अस्तित्व समर्पित करता हूँ। आपके मौन आशीर्वाद ने ही मेरी चेतना को शब्दों का प्रकाश प्रदान किया। अपने जीवन के प्रथम ज्ञानदाता पूज्य माता–पिता एवं समस्त गुरुओं के श्रीचरणों में कोटि–कोटि नमन अर्पित करता हूँ। साथ ही माँ शारदा , जिनकी कृपा से मुझे यह पावन ‘विद्यावाचस्पति’ उपाधि प्राप्त हुई, उनके चरणों में भी मैं बारम्बार नमन करता हूँ।

साहित्य–पथ पर मेरे प्रथम दीप को प्रज्वलित करने वाली साहित्यिक सचेतना संस्था एवं स्वास्तिक मासिक पत्रिका के संस्थापक एवं अध्यक्ष आदरणीय नरेंद्र रावत ‘नरेन’ जी तथा सचिव एवं संपादिका आदरणीया प्रीति डिमरी ‘प्रीत’ जी के प्रति मैं शब्दों में व्यक्त न किए जा सकने वाले ऋण से आबद्ध हूँ। आप दोनों ही मेरे साहित्यिक जन्मदाता हैं।

साहित्यिक सचेतना परिवार के समस्त पूज्य एवं प्रिय सदस्यों के प्रति भी मेरा हृदय कृतज्ञता से परिपूर्ण है। आपके निष्कपट स्नेह, आत्मीय अपनत्व, निरन्तर आदर और विश्वासपूर्ण सम्मान ने ही मुझे इस पावन उपाधि तक पहुँचने का सौभाग्य प्रदान किया। मेरी साहित्य–यात्रा में आपका प्रत्येक शब्द, प्रत्येक आशीर्वाद और प्रत्येक प्रोत्साहन एक दीपक बनकर मार्ग आलोकित करता रहा है। आप सभी को मैं हृदय की गहराइयों से सादर नमन, वंदन और कोटि–कोटि प्रणाम अर्पित करता हूँ।

मैं अपने परम मित्र एवं मार्गदर्शक आदरणीय डॉ. विपिन कुमार जी (महासचिव — विश्व हिन्दी परिषद तथा सदस्य — हिन्दी सलाहकार समिति, विदेश मंत्रालय) का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनकी प्रेरणा मेरे जीवन में एक सतत् ज्योति बनकर मेरा मार्ग आलोकित करती रही है।

आदरणीय डॉ. सीताराम आठिया जी (प्रधान संपादक — दीपशिखा 501 पुस्तक श्रृंखला एवं प्रदेश अध्यक्ष — विश्व हिन्दी परिषद, मध्यप्रदेश) के प्रति मैं सादर कृतज्ञता प्रकट करता हूँ, जिनके मार्गदर्शन, सहयोग और निरन्तर समर्थन ने मेरी साहित्यिक रचनात्मकता को एक सशक्त मंच प्रदान किया।

शिवोहम पब्लिकेशन, कोलकाता, पश्चिम बंगाल की संस्थापिका एवं प्रकाशिका आदरणीया प्रतीक्षा गांगुली नाथ जी , प्रेरणा गोष्ठी के अध्यक्ष, एडवाइज़र एवं एच.आर. आदरणीय राजशेखर पांडा जी तथा संस्था के मैनेजर आदरणीय प्रशान्त कुमार नाथ जी आप सभी की लेखकीय आस्था और निष्ठापूर्ण प्रकाशन–सेवा ने मेरी कलम को पाठकों तक पहुँचाया। इसके लिए मैं आप सभी का हृदय से आभारी हूँ तथा कोटि–कोटि वंदन एवं अभिनंदन अर्पित करता हूँ।

माँ शारदा साहित्यिक मंच, भोपाल (मध्यप्रदेश) के संस्थापक एवं अध्यक्ष आदरणीय राजू धाकड़ ‘सरल’ जी तथा संस्था के मुख्य कार्यकर्ता आदरणीय पवनेश मिश्रा जी द्वारा समय–समय पर प्रदत्त सम्मान और आदर के लिए मैं आप दोनों को हृदय की गहराइयों से सादर नमन करता हूँ।

कलम के हस्ताक्षर मंच, मेरठ (उत्तर प्रदेश) की संस्थापिका एवं अध्यक्षा आदरणीया सीमा गर्ग जी द्वारा प्रदत्त सम्मान–पत्रों से मुझे साहित्य के क्षेत्र में निरन्तर आगे बढ़ने की प्रेरणा और मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इसके लिए मैं आपको कोटि–कोटि नमन अर्पित करता हूँ।

नव भारत वार्ता एवं भारत की बात समाचार पत्र, भोपाल (मध्यप्रदेश) के संस्थापक एवं अध्यक्ष आदरणीय डॉ. गुंडाल विजय कुमार जी आपके स्नेह, सम्मान और सहयोग ने मेरे साहित्यिक जीवन को सुदृढ़ और सशक्त बनाया है। इसके लिए मैं आपका अति आभारी हूँ तथा आशा करता हूँ कि भविष्य में भी आपका स्नेह और मार्गदर्शन इसी प्रकार प्राप्त होता रहेगा।

आप सभी के पावन आशीर्वाद, सतत् सहयोग, मार्गदर्शन और स्नेह के कारण ही आज मैं ‘विद्यावाचस्पति’ के इस पवित्र शिखर तक पहुँच सका हूँ। गहन समर्पण–भाव के साथ मैं विनम्रतापूर्वक निवेदन करता हूँ कि यह सम्मान मेरा व्यक्तिगत नहीं, बल्कि आप सभी का है। मेरी प्रत्येक पंक्ति आपके स्नेह की प्रतिध्वनि है, मेरी प्रत्येक उपलब्धि आपके विश्वास की अमूल्य देन है और मेरी प्रत्येक साधना आपके आशीर्वाद से आलोकित है।

आप सभी को मैं शत–शत वंदन, हार्दिक आभार तथा कोटि–कोटि प्रणाम अर्पित करता हूँ।

योगेश गहतोड़ी “यश”
नई दिल्ली – 110059

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