
एक पल की चूक और जिंदगी बदल गई,
जो मंज़िल थी सामने, वो आँखों से निकल गई।
सोचा न था कभी ऐसा भी मोड़ आएगा,
वक्त का ये दरिया, सब कुछ बहा ले जाएगा।
हाथों से फिसल गई रेत की तरह वो खुशियाँ,
खामोश हो गईं अचानक घर की वो बोलियाँ।
एक छोटी सी गलती, बड़ा सबक दे गई,
हँसती हुई तकदीर को, आंसुओं में डुबो गई।
अब न वो रास्ते रहे, न वो कारवाँ रहा,
बस यादों का धुंधला सा एक आसमाँ रहा।
संभलना चाहा मगर, कदम लड़खड़ा गए,
हम अपनी ही परछाईं से, आज कतरा गए।
पर गिरकर संभलना ही तो नाम है ज़िंदगी,
बिखरे हुए टुकड़ों को समेटना ही है बंदगी।
वो एक पल तो बीत गया, अब नए कल की आस है,
चूक बड़ी थी माना, पर अभी भी हिम्मत साथ है।
रीना पटले,शिक्षिका
शास. हाई स्कूल ऐरमा, कुरई।
जिला- सिवनी मध्यप्रदेश












