
गोद में भारती के जनम पाए हो ,
माॅं से रिश्ता निभाने का वादा करो ।
जिस मिट्टी में पलकर जवाॅं हो गए ,
उसकी शोहरत बढ़ाने का वादा करो ।।
राष्ट्र के रत्नों में तुम रत्न बड़े ,
माॅं भारती के तुम बड़े लाड़ले ।
माॅं की मधुरिम ये वाणी तुम्हीं ,
मातृ सेवा संस्कृति तुम लाड़ले ।।
मातृ रक्षा तुम्हीं हो प्यारे जवाॅं ,
कुर्बानी देने को तुम इरादा करो ।
गोद में भारती के ।।
कसम तुम्हें अब उन शहीदों की ,
जिनने मरकर हमें आजादी दिया ।
बचे क्रांतिकारी थे नेता जो भी ,
गुमनाम होकर जीवन था जिया ।।
कुछ गोली खाए कुछ फाॅंसी चढ़े ,
वचन उनके निभाने का वादा करो ।
गोद में भारती के ।।
मातृ प्रतिष्ठा में जीते वही लाल हैं ,
निज जीवन माॅं को अर्पण किया ।
आई कभी जब जंग की ही बारी ,
युद्ध हेतु स्वयं को समर्पण किया ।।
आए संकट तिरंगे पे जब कभी ,
प्राण लेने देने को आमादा करो ।
गोद में भारती के _ ।।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।












