हिंदी हमारी पहचान है।।
हिंदी हमारी आन बान और शान हैं,
यह करती भारत माँ का गुणगान है।
यह हमारी एकता की आज मिसाल है,
हिंदी हम भारतीयों की पहचान है।।
इसमे हमारे ऋषि मुनियों का यशोगान है,
वेद पुराण रामायण महाभारत का सार है।
इसमे छिपा हमारे ज्ञान का भंडार है,
यह हमारी सांस्कृतिक विरासत का आधार है।।
आज इसे यूएनओ ने भी मान दिया है,
वैश्विक भाषा का इसे सम्मान दिया है।
भारतीयों ने जहां जहां तिरंगा फहराया हैं,
हमारी मातृभाषा हिंदी का परचम लहराया है।।
दुनियां के हर क्षेत्र में इसका विस्तार हुआ है,
जर्मन, उर्दू, हिंग्लिश,ब्रज,अवध व मराठी ,
सिंध,गुजराती,बांग्ला,डोगरी, पंजाबी सब इसके अंश हैं,
सारे जहाँ मे हो रहा हमारी संस्कृति का प्रसार है।।
राजस्थानी कोयल सी मीठी हैं बोली,
आओ नी पधारो म्हारे मरुदेश से स्वागत करती।
जिसने अपने शौर्य व तप से इसको सींचा,
उस मरूधरा का भी इसमे यशोगान छिपा है।।
हिंद और हिंदी की जय जयकार बोलिए,
मातृभाषा को मान्यता देकर मान दीजिए
हमें भीख नहीं यह अधिकार चाहिए,
हिंदी को राष्ट्रभाषा का सम्मान चाहिए।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












