19 वर्षों बाद ऐसा संयोग, मकर संक्रांति के दिन नहीं खा पाएंगे खिचड़ी, जानें वजह

ज्योतिषाचार्य पंडित बृजेश कुमार मिश्र, आचार्य, श्री जनकल्याणेश्वर महादेव मंदिर, सैनिक नगर, लखनऊ के अनुसार
मकर संक्रांति को साल के पहले और बड़े पर्व की मान्यता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। इस बार 19 वर्षों के बाद ऐसा महा संयोग हो रहा है कि मकर संक्रांति के दिन ही भगवान विष्णु का षटतीला एकादशी व्रत होगा। चूँकि सूर्य मकर राशि में 14 जनवरी को रात्रि 9.38 प्रवेश कर रहा है जिसका पूर्णकाल 8 घंटे पूर्व से 16 घंटे बाद तक रहता है, इसलिये सूर्योदय उपरांत 15 जनवरी 2026, गुरुवार
को मकर संक्रांति और खिचड़ी मनाई जाएगी।
मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी खाने की पुरानी परंपरा है। इस दिन लोग मकर संक्रांति पर्व को मनाने के लिए कई तरह के व्यंजन और स्वादिष्ट खिचड़ी बनाते हैं। खिचड़ी के साथ ही लोग घर पर बने तमाम व्यंजनों का स्वाद लेते हुए मकर संक्रांति को धूमधाम और उत्साह से मनाते हैं। यह बहुत सदियों पुरानी परंपरा है जो अब तक चलती आ रही है। इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी नहीं खाने की बात सामने आ रही है।
दरअसल, मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी नहीं खाने का सबसे बड़ा कारण ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस बार 14 जनवरी 2026 दिन बुधवार है। इस दिन लोग मकर संक्रांति पर्व मनाएंगे। इस दिन खिचड़ी खाना वर्जित नहीं होता है लेकिन इस दिन षट्तीला एकादशी व्रत होने के कारण लोग खिचड़ी नहीं खा पाएंगे। उन्होंने यह भी बताया कि ऐसा संयोग लगभग 19 वर्षों बाद पड़ रहा है। इस वजह से इस बार की मकर संक्रांति और भी खास रहेगी।
ऐसा कहा जाता है कि विष्णु भगवान के पर्व एकादशी में जो लोग व्रत रहते हैं उन्हें चावल खाना वर्जित है। इसलिए जो लोग भगवान विष्णु की पूजा के लिए एकादशी व्रत रहते हैं वो लोग इस बार की मकर संक्रांति पर खिचड़ी का आनंद व्रत के कारण नहीं ले पाएंगे। मान्यता के अनुसार एकादशी व्रत में चावल का प्रयोग करना वर्जित है।
इसलिए इस बार खिचड़ी के स्वाद से दूर रहना पड़ सकता है। हालांकि अगले दिन खिचड़ी बनाकर खा सकते हैं। जो लोग यह व्रत नहीं करते हैं वह भी आसानी से खिचड़ी बनाकर खा सकते हैं।
विद्यावाचस्पति डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र ‘आदित्य’
अध्यक्ष, मंदिर समिति,
श्री जनकल्याणेश्वर महादेव मंदिर, सैनिक नगर, लखनऊ।












