
बालपन में जिनका नाम नरेन्द्र था,
पढने लिखने में बहुत होशियार था।
उनके पिता वकील विश्वनाथ दत्त थे,
माँ भुवनेश्वरी देवी की गोद में खेले थे।।
बालपन में आध्यात्मिक गुरू मिले,
उनका नाम रामकृष्ण परमहंस था।
उनके हर सवालो का समाधान किया,
उन्होने अपना जीवन गुरू के नाम किया।।
वो राजस्थान के खेतडी़ महाराजा से मिले,
शिकागो धर्म सम्मेलन पर चर्चा करने लगे।
महाराजा ने शिकागो में जाने का निवेदन किया,
उन्होने नाम उनका विवेकानन्द धर दिया।।
वो ११ सितम्बर १८९३ को शिकागो गये,
“मेरे भाइयों और बहिनों” से उदघोष करने लगे।
तालियों से पांडाल गुंजायमान होने लगे,
सब लोग भारत का जयघोष यूं करने लगे।।
वो महान समाज सुधारक व विचारक थे,
सदैव युवाओं के बने मार्गदर्शक थे।
तुम उठो, जागो, फिर उदघोष करो,
अपनी मंजिल को तुम प्राप्त करो।।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












