
पिता,वो नाम है, जो शक्ति और छाँव है,
आपकी हँसी में छिपे, मेरे हर दर्द, घांव हैं।
जब भी गिरे हम, मिला आपका सहारा,
सूखे रेगिस्तान में, आप ही किनारा।
बचपन की गलियाँ, वो उंगली पकड़ चलना,
सपनों की खातिर, हर मुश्किल से लड़ना।
अपनी नींदें बेचकर, वो सारी रात जागना,
हर इच्छा कर पूरी , कुछ बिन मेरे माँगना।
कर्ज़ ये आपका, कभी चुका न पाऊँगी।
इस जीवन के हर पल में, बस आपको ही चाहूँगी।
आपके कंधों पे सदा, दुनिया का भार देखा है,
पर मेरे लिए सदा, मुस्कान का इकरार देखा है।
वो सख्त लहजा भी, भीतर से कितना कोमल है,
आपकी हर डाँट में छुपा, मेरे लिए संबल है।
अब जब मैं सोचूंगी , ये एहसास मुझे होगा,
आपसे बड़ा कोई, फरिश्ता नहीं होगा।
पिता वो नाम है, जो शक्ति और छाँव है,
आपकी हँसी में छिपे, मेरे हर दर्द,घांव हैं।
रीना पटले (शिक्षिका)
शास. हाई स्कूल ऐरमा (कुरई)
जिला- सिवनी (मध्यप्रदेश)












