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त्रिभाषा के रूपकर्ता डॉ. गुंडाल विजय कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक आयोजन


हैदराबाद।
एस. एच. एम. वी. फाउंडेशन, हैदराबाद द्वारा आयोजित त्रिभाषा सम्मेलन अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। त्रिभाषा (हिंदी–तेलुगु–संस्कृत) अभियान के रूपकर्ता डॉ. गुंडाल विजय कुमार के प्रयासों से प्रेरित होकर प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा इस अभियान से जुड़ी और सम्मेलन को नई ऊँचाई प्रदान की।
इस अवसर पर डॉ. गुंडाल विजय कुमार ने कहा कि “त्रिभाषा भारत को एक सूत्र में पिरोने वाली शक्ति है। यही भारत की वास्तविक परिभाषा है।” उन्होंने तीनों भाषाओं को भावी पीढ़ी के लिए आवश्यक बताते हुए इनके संरक्षण और प्रचार पर बल दिया।
प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा एवं एस. एच. एम. वी. फाउंडेशन, हैदराबाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में हिंदी, संस्कृत एवं तेलुगु भाषाओं को नई दिशा दी गई। प्रसिद्ध कवि संगम त्रिपाठी ने कहा कि त्रिभाषा सम्मेलन भावी पीढ़ी को भाषाई समन्वय और सांस्कृतिक एकता की प्रेरणा देगा।
विश्व हिंदी दिवस के अवसर पर साहित्यिक कार्यक्रमों के अंतर्गत कवि बालकृष्ण रामभाउ महाजन (नागपुर) की कृति ‘जंग अभी जारी है’ तथा ‘गंगांजलि’ साझा काव्य संग्रह का विमोचन किया गया। इस संग्रह में कवि संगम त्रिपाठी (जबलपुर), कवि पंकज बुरहानपुरी (बुरहानपुर), कवि श्याम फतनपुरी (लखनऊ) और डॉ. सोमनाथ शुक्ल (प्रयागराज) की रचनाएँ सम्मिलित हैं। इस कृति के संपादक डॉ. अजय शुक्ल हैं। ये रचनाएँ प्रेरणादायक और चिंतनशील उद्धरणों से परिपूर्ण हैं।
सम्मेलन में हिंदी प्रचार-प्रसार में सक्रिय योगदान के लिए दुर्गेश नंदिनी (हैदराबाद) को सम्मानित किया गया। वे लंबे समय से हिंदी के प्रचार एवं साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
कार्यक्रम में प्रमुख अतिथियों के रूप में डॉ. रावी नूतला शशिधर, तेलुगु वक्ता आचार्य कसी रेड्डी वेंकट रेड्डी (पूर्व अध्यक्ष, तेलुगु विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय), संस्कृत वक्ता चिलकमरी लक्ष्मीनाथ आचार्य (अध्यक्ष, संस्कृत भारती ट्रस्ट, तेलंगाना), हिंदी वक्ता गजेन्द्र पाठक (सीनियर प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, हिंदी विभाग, हैदराबाद) उपस्थित रहे।
इसके अतिरिक्त प्रदीप मिश्र ‘अजनबी’ (दिल्ली), रामवल्लभ इंदौरी, डॉ. दुर्गेश नंदिनी (हैदराबाद), राकेश मणि त्रिपाठी (पनवेल), अनिल राही (ग्वालियर), सुहास भटनागर (हैदराबाद), अजय कुमार पाण्डेय (हैदराबाद), कृष्ण कुमार द्विवेदी (नागपुर), मेघा अग्रवाल (नागपुर), राजेन्द्र कुमार रुंगटा (बिलासपुर), अंजलि मिश्रा तिवारी (बस्तर), सीमा शर्मा मंजरी (मेरठ), सोनिया नायडू (दुर्ग, छत्तीसगढ़), नरेन्द्र कल्याणकर, अवनीश कुमार शुक्ला, सुरेश जी (हैदराबाद) सहित अनेक साहित्यकार और भाषा-प्रेमी उपस्थित रहे।
संस्था के कार्यकर्ताओं एन. श्रीकांत रेड्डी, जे. श्रीधर, जे. राजु, कुलयी स्वामी, रोजा, संगीता आदि का सहयोग अत्यंत प्रेरणादायक रहा। सम्मेलन का समापन त्रिभाषा के प्रचार-प्रसार के संकल्प के साथ हुआ।

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