
देखो देखो शुभ मंगल बेला आई संग अपने ढेरों खुशियां लाई।
गुड़ तिल्ली की बने मिठाई, माँझा के संग पतंग मुस्कुराई।
धनु राशि से निकलकर किया मकर में प्रवेश।
उत्तरायण के शुभ समय में आया मेरा देश। स्नान करो और दान करो, आया उत्तरायण का त्यौहार।
नई फसल के आगमन का, उत्सव मनाए मेरा भारत परिवार।
कोई कहे लोहड़ी तो कोई कहे मकर संक्रांति।
पोंगल, बिहू, उत्तरायण नाम इसके भांति भांति।
सूर्य देव और शनि देव की शुभ मिलन की घड़ी है आई।
गुड़ तिल खाओ, पतंग उड़ाओ मिलकर खुशियां मनाओ भाई।
जीवन में नई खुशियां लेकर मकर संक्रांति का त्यौहार है आई।
नई ऊर्जा और समृद्धि के संग मकर संक्रांति का त्यौहार है आई।
नीली पीली लाल गुलाबी पतंग है उड़ते नभ में भाई।
माँझे के संग जुटी है पतंग नभ पर है खुशियां छाई।
सर्दी के अंत की कहानी है, रवि फसल की करो तैयारी।
ऋतु और फसल का पर्व लेकर देखो देखो मकर संक्रांति है आई।
अनिता महेश पाणिग्राही
सरायपाली छत्तीसगढ़












