
धिनक धिनक मन नाच उठा है
आया पर्व मकर संक्रांति का।
उपहार सभी को मिले प्रेम का,
मिट जाए तम भ्रांति का।
छत पर देखो मची है हलचल,
उड़ती पतंगें छूती अंबर,
लाल, गुलाबी, नीली, पीली,
हवा में करती हैं ये दंगल।
गुड़ और तिल की मिठास घुली है,
खुशियों की नई धूप खिली है,
काट के पेंच शोर मचाते,
टोली अपनों से आज मिली है।
गंगा की पावन लहरें बुलातीं,
नई फसल की खुशबू आती,
सूरज की किरणों संग झूमों,
खुशियाँ घर-घर ये है लाती।
रीना पटले शिक्षिका
शास हाई स्कूल ऐरमा कुरई।
जिला-सिवनी मध्यप्रदेश












