Uncategorized
Trending

प्रातकाल

अरुणोदय हर्षित हुआ  उषा सुंदरी देख।
उगता सूरज देखकर मिटी लालिमा रेख।।

लखी लालिमा गगन में हर्षित हुआ प्रभात।
पक्षी भी उड़ने लगे खगकुल वन को जात।।

होत सुबह बहने लगी, शीतल मंद बयार।
पुष्पों पर तितली उडें, भंवरे करते प्यार।।

शीत ऋतु की मार से वृक्ष  गिरातें पात
शीतलता कम हो गयी ,सबके मनको भात।।

प्रातकाल उठकर करो योग ,लगाओ ध्यान
मोह भवन का छोड़कर,, जा बैठो उद्यान।।

मंदिर में बढने लगी  भक्तजनों की भीड़
प्रभु शरण से न बडा, कोई जग में नीड.।।

पुष्पा पाठक

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *