
नौ मास कोख में रख जो पाती कष्ट प्रसूति का ,
ममता की छांव में ढककर पान करवाया स्तनों का,
क्या कर सकेंगे तुम्हारा कभी शुक्रिया माँ ।
जरूरतें अपनी छोड़ हर ख्वाहिश पूरी करते,
कंधों पर बिठाकर मेले में सपनों सा संसार दिखाते,
क्या कर सकेंगे तुम्हारा कभी शुक्रिया पापा।
छोड़ परिवार अपना सीमा पर वो डटे रहते,
दुश्मनों की गोली छाती पर लेते सुकून की नींद हमें सुलाते,
क्या कर सकेंगे तुम्हारा कभी शुक्रिया देश के जवानों।
पसीने की बूंदों से धरती को सींचते ,
जाड़े की रातों में हल को जोत हम तक निवाला पहुंचाते,
क्या कर सकेंगे तुम्हारा कभी शुक्रिया देश के किसानों।
जय माता जी की
विद्या बाहेती महेश्वरी राजस्थान।












