
जन्म-मृत्यु के बीच मूल्यवान है जीवन।
तन-मन स्वस्थ हो तो धनवान है जीवन।।
जन्म की पहली साँस से लेकर मृत्यु की अंतिम श्वास तक।
प्रतिदिन ईश्वर का ध्यान करते हुए हर पल अरदास तक।।
सुख-दुख की इस पहेली में कभी मत जाना ज़िंदगी में थक।
कर्मयोगी के समान ही कर्म सदैव करते रहना आप अथक।।
जन्म और मरण के चक्कर से आखिर कोई न बच पाया।
सहयोगी बन कर चलने वालों ने ही निज फ़र्ज़ है निभाया।।
कभी खुशी तो कभी गम ही हर इंसान ने यहाँ है पाया।
बड़े बुज़ुर्गों से लेकर हर बालक तक सबने कर्तव्य निभाया।।
जन्म से लेकर मृत्यु तक हमें कभी जीत तो कभी हार मिली।
ज़िंदगी की बगिया महकते फूलों के समान देखो खूब खिली।।
मुसीबतों और कठिनाइयों के बीच हर बार स्थिति भी हिली।
हे माधव! आपकी शरण में आकर ही हर खुशी हमें मिली।।
स्वार्थी जन निस्वार्थ सेवा करने वालों को जब करते हैं तंग।
तब ज़िंदगी मासूम को लगने लगती है एक प्रकार की जंग।।
केवल परोपकारी स्वभाव वाले ही भरते हैं भीतर अपने उमंग।
आलीशान बंगलों में सोने वाले न जाने कब छोड़ जाएँ पलंग।।
हे मनुज! जन्म-मृत्यु के बीच मूल्यवान है जीवन, ज़रा शीघ्र संभालो।
हे पार्थ! गीता में श्रीकृष्ण जी के द्वारा बताए गए ज्ञान को अपनालो।।
कवयित्री-डॉ. ऋचा शर्मा “श्रेष्ठा” करनाल (हरियाणा)












