जहाँ मुमकिन है हर मंजर,
वह दुनिया ढूँढ लेती हूँ,
हकीकत से ज़रा हटकर,
वह दुनिया ढूँढ लेता हूँ।
परिंदों की तरह उड़ती हूँ,
नीले आसमानों में,
बिना पर के, बिना डर के,
वह दुनिया ढूँढ लेती हूँ।
जहाँ खुशबू की लहरें हों,
जहाँ नदियाँ सुरीली हों,
मैं ख़्वाबों के किसी तट पर,
वह दुनिया ढूँढ लेती हूँ।
कभी मैं चाँद को छू लूँ,
कभी तारों से बातें हों,
हवाओं के हसीं रथ पर,
वह दुनिया ढूँढ लेती हूँ।
ज़माने की बंदिशों से,
जहाँ कोई गिला न हो,
मैं अपने ही ख़यालों में,
वह दुनिया ढूँढ लेता हूँ।
रीना पटले शिक्षिका
शास. हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला- सिवनी मध्यप्रदेश












