
दिलों में प्यार की खुशबू,
बसाकर हम भी देखेंगे,
वतन पर जान ये अपनी,
लुटाकर हम भी देखेंगे।
अनेकता में एकता की,
मिसाल-ए-हिन्द ज़िंदा है,
तिरंगा शान से नभ में,
उड़ाकर हम भी देखेंगे।
लिखा है जो विधान अपना,
वो सबको हक दिलाता है,
न्याय की एक नई दुनिया,
बनाकर हम भी देखेंगे।
न मज़हब का कोई झगड़ा,
न ऊंच-नीच की बातें,
सदा भाईचारे का दीपक,
जलाकर हम भी देखेंगे।
लहू वीरों का मिट्टी में,
अभी तक गूँजता है जो,
उसी मिट्टी का तिलक माथे,
लगाकर हम भी देखेंगे।
गणतंत्रता का ये दिन,
हमें संबल देता है,
वतन की जय का ये नारा,
लगाकर हम भी देखेंगे।
रीना पटले, शिक्षिका
शास हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला सिवनी मध्यप्रदेश












