
माँ वीणा वादिनी वर दें,
चारो ओर उजियारा कर दें।
अज्ञान का अंधियारा मिटा दें,
उर में ज्ञान की ज्योत जला दें ।।
बस यही तमन्ना,यही ख्वाब़ है मेरा,
सुर,ताल का वर मिले हमको ।
तुम आकर हमारे जीवन में,
चहुँ ओर खुशहाली कर दे ।।
हमें विचार क्रांति की राह मिले,
हमारें विचारों को नव पंख मिलें ।
हमें मान,सम्मान व उपहार मिलें,
सदैव नव साहित्य की प्रेरणा मिलें ।।
ज्ञान,सुरो का साथ मिलें,
हम हाथों में ले मशाल चलें ।
हमें देकर पुस्तक प्रतीक तेरा,
कलमकारों में उम्मीदों का बसंत खिलें ।।
हम करते रहे गुणगान तुम्हारा,
नित वीणा की झंकार मिले।
मानव कल्याण की राह मिले,
वसुधैव कुटुम्बकम के संग चले।।
स्वरचित..मौलिक,अप्रकाशित
एंव सर्वाधिकार सुरक्षित है ।
मुन्ना राम मेघवाल ।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान ।
Bhatimunnaram921@gmail.com












