
मानव जीवन बनता है तभी महान ,
व्यवस्थित रहता करता अनुशासन का मान,
सपनों की गहराई को समझना,
स्वाध्याय के दर्पण का कर लो ध्यान।।
मंजिल तुझको मिल जाएगी,
नित दिन मुश्किलें छट जाएगी ,
अनुशासन को दोस्त बनाया तो,
सामरिक जीवन में नियमितता आएगी।।
नियमों को परिभाषित है करती,
अनुशासित गर प्रकृति न रहती,
सृष्टि में जाने क्या क्या होता,
तारों संग चंदा की चमक न सजती।।
अनुशासन से व्यक्तित्व निखरता,
अन्तर मन को शांत है करता,
सही दिशा और सुगमता से,
मंजिल तक अपने है पहुंचाता।।
अश्क नहीं मुस्कान है मिलती,
सपनों को नई उड़ान है मिलती,
सही ग़लत का भान करता, दृढ़ता
और समर्पण विकसित करती।।
रजनी कुमारी
लखनऊ,उत्तर प्रदेश












