
गणतंत्र का यह पावन दिवस,
इतिहास नहीं — एक जीवित विचार है,
जहाँ नागरिक केवल शासित नहीं,
राष्ट्र की आत्मा और अधिकार है।
संविधान की पंक्तियों में
बलिदानों की गूँज समाई है,
न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता
चार स्तंभों पर भारत की परछाई है।
यह तिरंगा कपड़े का टुकड़ा नहीं,
यह संघर्षों का गौरवगान है,
हर रंग में छिपा हुआ
अनगिनत सपनों का सम्मान है।
अशोक चक्र की निरंतर गति
हमें रुकना नहीं सिखाती है,
हर युग में हर युवा को
नव निर्माण की राह दिखाती है।
आज का भारत प्रश्न भी करता है,
और उत्तर गढ़ने का साहस रखता है,
लोकतंत्र की सच्ची शक्ति
जागृत नागरिक में बसता है।
आओ आज प्रण लें इस धरती पर,
कर्तव्य को अधिकार से ऊँचा रखेंगे,
विचार, श्रम और नैतिकता से
भारत का उज्ज्वल भविष्य लिखेंगे।
गणतंत्र दिवस केवल उत्सव नहीं,
यह आत्ममंथन का अवसर है,
जब हर भारतीय कह सके गर्व से—
मैं ही इस राष्ट्र का उत्तरदायित्व हूँ।
नाम-पल्लवी पटले
जिला-सिवनी, मध्यप्रदेश












