Uncategorized
Trending

प्रीत प्रेम की रीत

प्रीत प्रेम की रीत अनोखी किसको कौन सिखाए,
मन से मन के तार जुड़े जब अपने आप ही आए।
पवन बसंती जब लहराये तरु पादप हरषाये,
शर्म से रक्तिम हो वल्लरियाँ तरु से लिपटी जायें।
प्रेम प्रीत की रीत अनोखी किसको कौन सिखाए?
मंजरिया जब आम्र वृक्ष की सुरभित कर दें घर आंगन,
भ्रमरों को कौन खबर देता है दौडें लेकर पागल मन?
कोयल क्योंकर कुहूके दिन भर, ढूंढ किसे बौराये?
कैसे समझे प्रेम को कोई,सदियां यूं चलती जाए।
प्रेम प्रीत की रीत अनोखी किसको कौन सिखाए?
रात की रानी चुपके खिलकर जाने किसे बुलाए?
हम तुम कैसे समझेँ किसके मन को कौन सुहाए?
प्रेम प्रीत की रीत अनोखी किसको कौन सिखाए?
प्रेम का ढाई आखर बांचे, बस वही है जान पाए!

सुलेखा चटर्जी भोपाल

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *