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इस ब्रह्मांड में साक्षात ब्रह्म ही अलग-अलग रंग-रूप, आकृति और गुणों वाले जीव के रूप में मौजूद हैं …. असाधु !

भोपाल/जबलपुर, तुलसी मानस प्रतिष्ठान भोपाल, रामायण केंद्र भोपाल,श्रीरामचंद्र पथ गमन, संस्कृति विभाग, मध्य प्रदेश शासन के संयुक्त तत्वाधान में  दिनांक 13 मार्च एवं 14 मार्च 2026 को मानस भवन, भोपाल में आयोजित किए जा रहे दो दिवसीय चतुर्थ अंतरराष्ट्रीय रामायण कॉन्फ्रेंस में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक इंजी . संतोष कुमार मिश्र ‘ असाधु’ ने भगवान शिव द्वारा ‘ श्रीरामचरितमानस ग्रंथ के नामकरण ‘ विषय पर  एक अत्यंत रोचक शोध पत्र प्रस्तुत किया गया । इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से लगभग 60 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं। अपने संबोधन में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक एवं प्रसिद्ध धार्मिक चिंतक इंजी. संतोष कुमार मिश्र ‘असाधु ‘ जो कि वर्तमान में मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं,के द्वारा बताया गया कि रामचरित मानस कोई सामान्य किस्सा-कहानी वाला ग्रंथ कदापि नहीं है बल्कि यह एक अत्यंत गूढ़ ब्रह्म विद्या विज्ञान है। उन्होंने बताया कि ईश्वर के द्वारा सृष्टि निर्माण से लेकर सृष्टि के विनाश के मूल में केवल और केवल मन तत्व ही होता है। हमारा मन दुनियां के उस दरवाजे की तरह होता है जिसके एक ओर से प्रवेश करने पर यह जीव या तो दुनियां के भिन्न-भिन्न मायावी झंझावातों में फंस जाता है वहीं दूसरी ओर मन द्वार से बाहर से निकल कर वह दुनियांदारी के चक्र से सदा-सदा के लिए मुक्त हो जाता है। श्री मिश्र ने अपने इस शोध पत्र में रामचरितमानस के प्रत्येक कांड में भिन्न-भिन्न पात्रों के माध्यम से मन तत्व की व्याख्या की गई। इसके अतिरिक्त रामचरित मानस के नामकरण के सम्बन्ध में और भी कई गूढ़ विषयों का रहस्योद्घाटन किया गया। श्री मिश्र के इस अनूठे शोध पत्र की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें आयोजकों द्वारा भी सम्मानित किया गया है।
श्री मिश्र द्वारा जन जागृति की दिशा में इस तरह के अभिनव कार्य करते हुए संस्कारधानी जबलपुर का नाम अंतरराष्ट्रीय क्षितिज पर पुनः गौरवान्वित किया है। कवि संगम त्रिपाठी ने बधाई दी और कहा कि संतोष कुमार मिश्र ‘ असाधु’ साहित्य व अध्यात्म के माध्यम से समाज को दिशा देने का काम कर रहे हैं।

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