
साचा माईं का दरबार है
मातृत्व से परिपूर्ण माईं का संसार है
रौद्रत्व का रूपधारी माईं वात्सल्य से परिपूर्ण तेरा असीम प्यार है
तेरे दर्शन मात्र से ही हे मेरी माईं भक्तों का खिल जाता घर संसार है
दुष्टों और दुर्जनों की संहारक माँ तू सम्पूर्ण ब्रम्हांड की तारणहार है
तेरी स्तुति मात्र से ही माँ पाते सात जन्मों का पुण्य अपार है
सौम्यशाली पापनाशिनी रक्त नयन रक्त जिव्हा दुख हरण मंगल करण माँ तेरी अदभुत छवि निराली है
जगजननी माँ पंचतत्वधारिणी नभ पाताल धरा मे विचरती करती दुष्टों का संहार भक्तों का कल्याण माँ तू शेरावली तू लाटावालि पहाड़ावाली है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











