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नारी शक्ति:

नारी तुम
अबला हो तब तक,
जब तक कि तुम
भागती रहोगी
अपने शक्ति की खोज में
जगह-जगह ।
भले ही तुम,
बन जाओ
तरह-तरह की देवियां,
और
तरह-तरह की शक्तियां,
लेकिन
व्यथित और थकित
होती रहोगी ,
तरह-तरह के निशाचरों की
हरकतों से सदा।
कोई भी रूप ,
न बना सकेगा कभी भी,
सबला तुम्हें ।
दरअसल
मूल स्वभाव है तुम्हारा,
केवल
प्रेम स्वरूपा।
तुम बनो माता की
प्रेममयी मूर्ति,
और केवल
वही प्रेम का रिश्ता,
बना देगा तुम्हें सबला ,
ईश्वर की अर्धांगिनी स्वरूपा,
प्रेम और करुणा स्वरूपा
माम् माॅ माॅ ।।

इंजी. संतोष कुमार मिश्र ‘असाधु’
जबलपुर मध्यप्रदेश

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