Uncategorized
Trending

किताबों से दोस्ती

बीते हुए कल को याद न कीजिए ,
हर बात,हर घटना के लिए
अपने आप को दोषी मत मानिये।
छोटी -छोटी बातों को सोचकर ,
दिमाग़ का दही मत कीजिए ।
हर किसीसे रिश्ता निभाने के,
चक्कर में
अपने आप को न खो दीजिए।
पर इसका मतलब यह नहीं की,
दुनिया से आप को कुछ लेना – देना नहीं,
बल्कि प्रूफशोधन कक्ष में
बैठ किताबों से दोस्ती कीजिए ,
अपनी हर धड़कन की रवानी को
किताबों को पढ़ने में लगा दीजिए।
जो लिखी है आपने,अपने ख्यालों की
खुबसूरत कहानी को,
प्रत्यक्ष रूप में साकार करने के लिए
निरंतर प्रयास कीजिए ।
चाँद, तारों की रौशनी में बैठ
किताबों में छिपे ज्ञान की,
बातों को अपने अक्स में ,
ढालने का संकल्प कीजिए ।
दिल की शमा को ,
किताबी ज्ञान को व्यवहार में
लाकर रौशन कीजिए।
तुम जो आय मेरी जिंदगी में,
अब किसी दोस्त की जरूरत नहीं,
यह बात अपनी किताबों से कीजिए।

डॉ. परवीन शेख
तह. देगलुर जि. नांदेड़,
महाराष्ट्र।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *