
बेटी हुई पराई पापा दिल ना दुखाना
घर आऊंगी जल्दी प्यार दुगना देना ।
मोती की लड़ियों जैसे आंसू न बहाना
जब याद आए मेरी बस फोन लगाना,
याद है वह शिक्षा जो आपने दी थीं
दो कुल का गौरव हो तुम लाज निभाना
घर आऊंगी जल्दी प्यार दुगना देना ।।
ना भूल पाऊगी कभी कंधे पे तेरे चढ़ना,
भूलूंगी कैसे पापा तेरे गले से लिपटना
संग मार्केट जाना चॉकलेट लेकर आना
भैया को सताना मम्मी के गले लग जाना
घर आऊंगी जल्दी प्यार दुगना देना ।।
मम्मी दुखी होगी उन्हें भी संभालना
व्यस्त खूब रहना खाना टाइम सेखाना,
अब समय बदल गया है दूरी न रही कोई
मिलने की इच्छा हो तो बस कदम बढ़ाना
घर आऊंगी जल्दी प्यार दुगना देना ।।
चीजे मेरी सारी संभाल कर सदा रखना
टूटे नहीं कोई ,नहीं तो मजा भी चखना,
याद आती बहुत पापा बनारस की गलियां
, खेलते थे सखियों से डाल गलबहियां ,
इतना नहीं आसान है उन सबको भुलाना
घर आऊंगी जल्दी प्यार दुगना देना।।
पुष्पा पाठक छतरपुर मध्य प्रदेश













