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शिक्षक ही क्यों ??

जनगणना हो, चुनाव हो—हर काम में हमें बुलाया जाता,
शिक्षा का दीप जलाने वाला ही बार-बार घसीटा जाता।

एग्जाम का समय, फिर ट्रेनिंग का बोझ,
रिजल्ट बनाएं कब—ये सबसे बड़ा रोज़ का खोज।

कक्षा में बच्चों को ज्ञान भी देना है,
फाइलों में उलझकर कर्तव्य भी निभाना है।

दिनभर की भागदौड़ में समय कहाँ मिलता है,
फिर भी शिक्षक हर जिम्मेदारी को दिल से निभाता है।

स्कूल, समाज, देश—तीनों का भार उठाता है,
फिर भी मुस्कुराकर अपना फर्ज निभाता है।

स्वरचित मौलिक रचना
प्रतिभा दिनेश कर
विकासखण्ड सरायपाली

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