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विश्व पुस्तक दिवस

जी हां, मैं पुस्तक हूं अपनी कहानी सुनाती हूं
करती हूं बातें बीते हुए कल की
क्या तुम मेरी कहानी सुनना चाहोगे..?
मैं कुछ कहना चाहती हूं ,तो सुनो
मेरे हर पन्ने में छुपा है नया संसार
मेरे हर पन्ने में शब्दों की मोती पिरोए हुए
पाठकों के मन को आह्लादित करती है
मैं लेखकों को मां के जैसा ममत्व देती हूं
कभी दोस्त बनकर हंसना सिखाती हूं
तो कभी गुरु बनकर मार्ग प्रशस्त करती हूं
कभी दर्पण बनकर सत्य से अवगत कराती हूं
प्रेमचंद, शेक्सपियर ,टैगोर, महात्मा गांधी, रानी लक्ष्मीबाई सभी हैं सदियों से रखे अलमारी की शोभा बढ़ा रहे
अलमारी से निकलकर पढ़ो तो पूरी
जानकारी मिलेगी, अद्भुत ज्ञान हासिल होगा
मानती हूं कि आज गूगल सब बता देता है
फिर भी देखो तो ,पढ़ो तो,पुस्तक पुस्तक ही है
जो दिल को छू जाती है, ज्ञान से अवगत कराती है
मोबाइल की स्क्रीन आंखों को थकाती है
पर मेरे हर पन्ने अच्छी नींद लाती है
मोबाइल थोड़ी देर के लिए हटा दो
एक कहानी जरूर आज पढ़ डालो
विश्व पुस्तक दिवस पर कर लो मुझसे
दोस्ती
आओ संकल्प लो, जो पढ़ता है मुझे
वही बढ़ता है आगे और जो बढ़ेगा,
वही नया इतिहास गढ़ेगा
तो आओ दोस्तों! आप पुस्तक को पढ़ें और मन के आंगन को ज्ञान से महकाएं

डॉ मीना कुमारी परिहार

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