
खुली किताब सी नार है, भाव भरे हर पात।
पढ़ न सके हर एक जन, गहरे उसके बात॥
सरल वाणी सी लगे, अर्थ अनंत अपार।
जो समझे मन की धुनि, वही बने हुशियार॥
साधारण सी दिखे मगर, मोल अनमोल महान।
संग निभाए जो सदा, वही करे पहचान॥
पहेली सी मुस्कान में, छिपे अनेक विचार।
सुलझे प्रेम-सम्मान से, खुल जाए व्यवहार॥
नाजुकता में शक्ति है, सहनशीलता सार।
नारी ही जीवन धुरी, उसका रूप अपार॥
ममता की है छाँव वो, करुणा का संसार।
आँचल में सुख-शांति है, जीवन का आधार॥
त्याग-तपस्या रूप में, उज्ज्वल उसका नाम।
हर पीड़ा को हँस सहे, रखे सदा सम्मान॥
संकट में बन ढाल वो, देती सबको साथ।
अडिग खड़ी हर मोड़ पर, थामे जीवन हाथ॥
सृजन शक्ति की ज्योति है, उजियारा हर ओर।
नारी से ही जग सजे, नारी जीवन डोर॥
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर छत्तीसगढ़













