
विश्व पुस्तक दिवस पर विशेष
मैं पुस्तक हूं, बिछी पड़ी है मेरे पन्नों में एक अंतहीन वेदना, अतीत की झलक, इतिहास की परिपाटी, सुंदर कहानियाँ, गीत और अनुसंधान की झलक आओ कभी मेरे पास, मैं हूं तुम्हारी सबसे अच्छी मित्र, साझा करो मुझसे अपने सपने, चल पड़ूंगी उन्हें पूरा करने तुम्हारे साथ पर एक बात कहूं अब तो तुमने ही बना ली है मुझसे दूरियां मुझे अभी भी है तुम्हारा इंतजार क्योंकि मैं हूँ तुम्हारी सच्ची साथी और पथप्रदर्शक भी……..
सरोज बाला सोनी
कवयित्री













