
मुक्तक
हे करुणानिधान!सबके पालनहार।
शिव परमपिता हैं सबके तारणहार।
शंभु आप ही कण -कण में विद्यमान हैं-
दुष्ट जनों का कर देते पल में संहार।
शिव भक्ति के दाता याचक आते।
शिव रुप में नव भक्ति दर्शन पाते।
शिव ही सत्यं,शिवं, सुन्दरं स्वरूप –
शिव पूजन में भक्त ध्यान लगाते।
भोले शंकर तुम आदि अनंत हो।
इस धरा के तुम ही महा संत हो।
जीवन नैया के पतवार हो प्रभु-
त्रिगुणस्वामी भक्ति मिले अनंत हो।
डॉ सुमन मेहरोत्रा’सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार











