
जय-जय अंजनीसुत वीर बजरंगी,
भक्तों के रखवारे हो।
संकट हरते मंगल करते,
दीनन के तुम तारे हो।।
लाल सिंदूरी तन अति शोभित,
तेज पुंज अवतारे हो।
राम-नाम रस सदा पियारे,
भवसागर के धारे हो।।
बड़ा मंगल का पावन दिन यह,
भक्ति-भाव उर छाए हैं।
लड्डू, चोला, दीप प्रज्वलित,
सब मिल गुणगान गाए हैं।।
जहाँ-जहाँ तुम चरण धरत हो,
दुख-दरिद्र मिट जाते हैं।
सच्चे मन से जो ध्यावे तुमको,
संकट दूर भगाते हैं।।
सीता-राम बसें उर भीतर,
तुममें उनकी छाया है।
रामदूत अतुलित बलधामा,
तुमसे जग जगमाया है।।
करुणा बरसाओ हे बजरंगी,
आशीष हमें दे दीजै।
भक्ति-शक्ति, सद्बुद्धि प्रदान कर,
जीवन सफल कर दीजै।।
डाॅ सुमन मेहरोत्रा ‘सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार












