
विधा- गज़ल
जब खफा नही खता किससे करोगे
ए दिल बता वफ़ा किससे करोगे
तरबियत जरा नासाज़ है तो क्या गम
जिगर एक है ऐतराज बता किससे करोगे
हर दिल बाज़ार मे तन्हा ही मुकम्मिल है
ना उम्मीदी मे ही नासाज़ नाकाबिल है
दो चार जो दो चार से ही हरमिज़ाज़ है
बता मेरे दिल इमदाद वजह क्या करोगे
जब खफा नही खता किससे करोगे
आरज़ू जिगर की जिगर मे ही फना हो गयी
कहानी तेरे मेरे साथ की बेवजह ही दफन हो गयी
हसरतें मिसरतें सब पनपने से पहले ही मिनाज़ हो गयी
क्या कहे क्या सहे दीदार अर्ज़ अब ख्वाब हो गये
अर्ज़ हमारी अब इन आँखों से हमराज क्या होगे
जब खफा नही खता किससे करोगे
ए मेरे जख्म बता तेरा इलाज कौन करेगा
जीते जागते हमराह का आगाज कौन करेगा
तेरा मेरा एक दिल है जानिसार होगा
रब की फतेह है इकरार ज़रुर होगा
तेरे हर सितम पर जाँ मेरी नाज़ कैसे करोगे
जब खफा नही खता किससे करोगे
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र












