
परिणय की मंगल वेला में
दो फूल संवारने आए हैं।
सज धज कर जीवन आंगन में,,,,
ये फूल आज मुस्काये है ।।
नव कुसुमित कोमल दो कलियां,,,
दूर ठाव से आई है,,,,,,।
अनजानी राहों से चलकर
इस एक डगर पे आई है।।
लेने को आशीष आपका
इनकी अखियां ललचाई है,
खुश हो मंगलवर दो इन्हें,
इनकी खुशियां शरमाई है।
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर ,मध्य प्रदेश












