
भोले शंकर मुझे बचा लो, इन बुरे ख्वाबों ख्यालों से।
सारे मेरे पीछे पड़े हैं जाने कितने सालों से।।
एक तू ही सहारा मेरा दूजा और कोई जानू ना।
तू मेरे सारे दुख हरेगा और किसी को मानू ना।।
एक तुझी से आस हैं भोले मदद ना चाहु जग वालों से….
मेने सुना है इस ब्रह्मांड में बड़े आप कहलाते हो।
संकट में सबसे पहले आप ही सहायक बन जाते हो।।
तुम ही तो कवच बनकर बचाते सबको बुरी चालों से….
सबसे अलग और अनोखे तुम ओघड़ दानी हो शंकर।
क्रोध में तुम जब आते तो रूप दिखलाते हो भयंकर।।
सब देवों को आप बचाते राक्षस कठिन सवालों से…..
साधू संत ऋषि मुनि की वाणी महिमा तेरी सुनाती है।
ये दुनियां निस्सार हैं बंदे फिर भी मुझको भाती हैं।।
अब आकर मुझे बचालो माया के मनोहर भालों से…..
गीतकार मनोहर सिंह चौहान मधुकर












