
सब सच्चे है तो झूठा कौन,
उत्तर सरल है पर प्रश्न कठिन।
कुछ गढ्ढे है जो भर जायेंगे,
भेद-भाव के पौधे उग आयेंगे।
झोपड़ पट्टी झुलस रही है,
मंहगाई की आग बरस रही है।
दोगले यशगाथा गा रहे है,
नेताओं की कथा सुना रहे हैं।
डगर – डगर शिक्षित घूम रहा,
अगर मगर नेता बोल रहा।
पल्ला जिम्मेदार झाड़ रहा है,
विजय पताका गाड़ रहा है।
कवि संगम त्रिपाठी
जबलपुर मध्यप्रदेश












