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मेरे घर का पेड़

मेरे घर के बाड़ी के बीचो-बीच
आज भी है खड़ा बूढ़ा बरगद का पेड़
सदियों बीत गए वो आज भी खड़ा है
न जाने कितनी बरसतें देखीं, कितने सावन देखें, कितने ग्रीष्म
मेरे दादाजी ने लगाया था इसे
मां ने मुझे बताया कि जब
मैं शादी होकर आई थी, इसकी छांव
तले, घंटों दादाजी बैठे रहते थे
अपने दोस्तों के संग, ठहाका लगाया करते थे
जब मैं मां के गोद में आई
इसी पेड़ में अपनी बाहों में मुझे झूला झुलाया
जब भी आंधी आती, तो हम सबको बचाता
तेज लू चलती तो, छतरी बनकर रक्षा करता
इसके फल- फूल से है दवाइयां बनती
पत्ते भी खूब लाभदायक होते
समय के साथ बड़ी होती ग‌ई
इसी की छांव में सहेलियों के संग पढ़ते और खेलते थे
यह हमारे घर के बाड़ी का केवल पेड़ नहीं, हमारे घर का बुजुर्ग है
बुजुर्ग की तरह हम सब का ख्याल रखता है
कितनी पीडिया को और प्रेरणा देता रहेगा
जब तक हमारे घर में यह वृक्ष है हमारे बचपन की यादों को संजोए रहेगा
हमारे घर के पेड़ न केवल पर्यावरण को सुंदर बनाते हैं बल्कि मानसिक शांति और ताजी हवा प्रदान करते हैं
ये वटवृक्ष, हम सबका गहना है
इसके बिना जीवन नहीं जीना है
हमें हर शुभ अवसर पर एक वृक्ष जरुर लगाना चाहिए
वृक्ष है तो हम हैं वृक्ष से ही सांसें चलती हैं

डॉ मीना कुमारी परिहार

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