
मोरे कृष्ण कन्हैया आयो रे,
मटका फोड़े गोपी छेड़े,
सबका माखन खायो रे,
सारे गोपियों को मोह लगायो रे,
मोरे कृष्ण कन्हैया आयो रे।
यशोदा मैय्या का आंख का तारा,
गोकुल का है राज दुलारा,
नटखट है कृष्ण कन्हैया,
सबका माखन चुरायों रे,
मोरे कृष्ण कन्हैया आयो रे।
राधा रानी है प्रेमसांगिनी,
कृष्ण प्रेम में हो गई दीवानी,
मुरली की धुन सुन सुदबुद खोई,
गोपी संग रास लीला रचायो रे,
मोरे कृष्ण कन्हैया आयो रे।
यमुना तट मां बांसुरी बजायों,
सखा संग क्रीड़ा रचायों रे,
कलिया सर्प सर नाच दिखायो ,
अद्भुत दृश्य दिखायो रे,
मोरे कृष्ण कन्हैया आयो रे।
कान्हा की मुरली संग,
वृंदावन भी झूम गयो,
माखन चुरा खायों मुख देखो
यशोदा मैय्या रूठ गयो,
मोरे कान्हा माखन चोर कहलायो रे,
मोरे कृष्ण कन्हैया आयो रे।
नलिनी शैलेन्द्र दास
सरायपाली छत्तीसगढ़












