Uncategorized
Trending

अंत ही शुरुआत है

अंत ही शुरुआत है
अंत ही शुरुआत है।
सागर में उठती लहरों को देखो।
जरा पल भर तो ठहर कर देखो।
जाने कितनी ही लहरें……….
उठती हैं खो जाती हैं।
इन लहरों का खो जाना,
इन लहरों का अंत है क्या।
एक लहर के पीछे जाने,
कितनी लहरें आती हैं।
जरा ठहर देखो लहरों को,
ये हर एक लहर अलग है क्या।
सागर में उठती, सागर में खोती,
बस सागर की हो जाती है।
क्योंकि……….
हर एक लहर सागर में,
सागर की ही होती है।
अंत जिसे कहते हो तुम,
वो तो नई शुरुआत है।
लहरों का आना और जाना,
सागर के ही हाथ है।

रचनाकार- श्रीमती सुनीता बोपचे सिवनी (म प्र)

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *