
7 मई 1861 को जिनका जन्म हुआ,
उनका कोलकाता पावन धाम हुआ।
गीतकार बनकर वो उभरे जग में,
मानवता का हमको संदेश दिया।।
राष्ट्रवाद की यूं अलख जगायी,
भारत को नव राष्ट्रगान दिया।
आजादी के उस रण बांकुरे ने,
सत्ता के सिंंहासन को हिला दिया।।
चित्रकारी में रूचि थी उनकी,
प्रकृति प्रेम को यूं प्रकट किया।
संस्कारों के नित साथ साथ ही,
ज्ञान विज्ञान को महत्व दिया।।
मन्नू सदा हिंसा से नफरत थी उनको,
वसुधैव कुटुम्बकम का पैगाम दिया।
हमारे राष्ट्रप्रेम के इस सजग प्रहरी ने,
आज सत्ता को फिर ललकार दिया।।
आज गीताजंलि पर नोबल पाकर,
भारत भाल को नित ऊँचा किया।
शांतिनिकेतन की स्थापना करके,
मन्नू शिक्षा का हमको पैगाम दिया।।
मुन्ना राम मेघवाल
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।












