
दिल लगा जिस दिल से, वो दिलदार होना चाहिए।
आंखों में हो हया,और वफादार होना चाहिए।।
चाँद सूरज हो ना हो, टिमटिमाते तारे न हो।
राह में रौशनी के लिए, चिराग होना चाहिए।।
बेचैनियाँ गर हो ना हो, मिलन चाहे कमतर हो।
आंखों में फिर भी, इंतज़ार होना चाहिए।।
रिश्ते केवल शब्दों से, जिंदा नहीं रहते।
हर रिश्ते में अपनापन का, व्यवहार होना चाहिए।।
दौलत, शोहरत, रूप का क्या है, सब मिट जाएगा।
इन्सान के भीतर बस अच्छा, किरदार होना चाहिए।।
हर कोई साथ छोड़ दे, मुश्किल की राहों में मगर।
हमसफर का साथ, हर बार होना चाहिए।।
ज़ख्म चाहे लाख मिलें, इस मतलब की दुनिया में।
होठों पर फिर भी थोड़ा, मुस्कान होना चाहिए।।
दिल लगा जिस दिल से, वो दिलदार होना चाहिए।
आंखों में हो हया, और वफादार होना चाहिए।।
रवि भूषण वर्मा











