
नीट एग्जाम पेपर यूं रद्द हो गया,
ख्वाब डाॅक्टर का यूं तोड़ गया।
मेहनत का पैसा पानी में बह गया,
लाखो यूवाओं को मायूस कर गया।।
यूवा खुशियो की तैयारी मे लगे थे,
आज उनके घर मे मातम छा गया।
भ्रष्टाचार का यह महादानव आज,
यूवाओं की मानसिक हत्या कर गया।।
रोजगार मांगने पर लाठियाँ मिलती है,
कहीं पैपर लीक का दानव दिखता है।
विश्वगुरू भारत की शिक्षा नीति को,
आज वो भ्रष्टाचारी नाग यूं डसता है।।
सरकारे नींद में यूं सोयी हुयी है,
ना रोजगार की कोई बात करो।
नित पकोडे़ तलो तेल में तुम यूं,
मन्नू सदैव अपना पेट यूं भरा करो।।
वो जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है,
एनटीए को भी यह आभास नहीं है।
सरकार तेल खरीद में यूं व्यस्त है,
भला वोटों की किसे यूं जरूरत है।।
देखो न्यायपालिका नित जाग रही है,
मौलिक अधिकारो की रक्षा कर रही है।
वो हमें समय पर फैसला सुनाकर के,
सवैधानिक मूल्यों को यूं बचा रही है।।
अपनी शक्ति को खुद पहचानो,
पत्थर को पानी कर सकते हो।
क्रांति की नयी राह चुनों तुम,
सता को चुनौति दे सकते हो।।
स्वरचित,मौलिक,अप्रकाशित है।
मुन्ना। राम मेघवाल ।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।
+91 8875650006.












