
समय बड़ा बलवान है बंदे,
समय का पहिया चलता रहता,
समय के साथ जो खुद को ढाले,
उसका जीवन पलता रहता।।
रेत सरीखे फिसल गया जो,
वापस कभी लौट नहि आए,
चतुर सुजान वही है जग में,
वक्त की इज्जत करना आय।।
समय चक्र ने सबको ही,
नए-नए चेहरे दिखलाए।
थे राजा पर रंक हो गए।
डोम के घर में पानी भराए।।
समय एक सा रहे न जग में,
संघर्षों से हम लड़ते जाय,
गिर कर भी जो खड़ा हो गया,
समय उसे ही विजेता बनाए।।
भगवानदास शर्मा “प्रशांत”
इटावा उत्तर प्रदेश












