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कुछ टुकड़े जिंदगी के,

कुछ टुकड़े दर्द भरी जिंदगी के,
अब भी आँखों में ठहरे रहते हैं,
कुछ अपने होकर भी दूर हुए,
कुछ सपने चुपचाप बिखरते हैं।

कभी रातों ने चुपके से आकर,
तकिए को आँसुओं से भिगोया है,
कभी अपनों की खामोशी ने,
मन को भीतर तक रोया है।

पर कुछ प्यारे लम्हे भी हैं,
जो आज भी मुस्कान बन जाते हैं,
माँ की मीठी डाँट में अक्सर,
सारे ग़म कहीं खो जाते हैं।

दोस्तों संग वो हँसी ठिठोली,
आज भी दिल में महक रही,
बारिश में भीगी वो छोटी खुशियाँ,
यादों में चुपके चमक रही।

जिंदगी दर्द का नाम नहीं,
ये खुशियों का भी पैगाम है,
कुछ आँसू इसकी किस्मत हैं,
कुछ हँसी इसका सम्मान है।

कुछ टुकड़े दर्द भरी जिंदगी के,
कुछ प्यारे लम्हे जिंदगी के,
इन्हीं रंगों से सजकर शायद,
पूरा होता हर इंसान है।।

नेहा कुमारी

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