
कुछ टुकड़े ज़िंदगी के यूँ ही,
यादों में आकर मुस्कुराते हैं,
कुछ अधूरे सपनों के किस्से,
चुपके से दिल को सहलाते हैं।
कभी माँ की ममता की छाया,
कभी पिता की सीख सुहानी,
कुछ रिश्तों की मीठी खुशबू,
कुछ अपनों की बातें पुरानी।
कुछ प्यारे लम्हे बंदगी के,
जब मन ईश्वर में खो जाता है,
भीड़ भरी इस दुनिया में भी,
दिल को सुकून मिल जाता है।
सुबह की आरती की धुन में,
एक मीठा विश्वास जागता है,
मिट्टी की सौंधी खुशबू संग,
मन हर दुख से दूर भागता है।
कभी दोस्तों की हँसी में खुशियाँ,
कभी बारिश संग भीग जाना,
छोटी- मान मनुहारों में ही,
जीवन का असली सुख पाना।
कुछ आँसू भी हिस्से आए,
कुछ मुस्कानों ने साथ दिया,
ज़िंदगी ने हर मोड़ पर आकर,
कुछ छीना तो कुछ खास दिया।
कुछ टुकड़े ज़िंदगी के ऐसे,
जो दिल में दीप जला जाते,
कुछ प्यारे लम्हे बंदगी के,
रूह को मंदिर बना जाते।।
प्रोफेसर सुषमा देवी












