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स्वयं संघर्ष की राह

चावल से कंकड़ चुनना,
हर गृहिणी की आदत होती है,
वैसे ही जीवन की राहों में,
संकटों की भी आहट होती है।

कोई और नहीं आता अक्सर,
दुख की गठरी हल्की करने,
अपने साहस के हाथों से ही,
पड़ते हैं काँटे चुनने।

जैसे धैर्य से साफ किए जाते,
चावल के छोटे-छोटे पत्थर,
वैसे ही विवेक और मेहनत से,
दूर होते जीवन के संकट हर।

मुश्किलें हमें तोड़ती नहीं,
जीना सिखाने आती हैं,
संघर्षों की तपती धूप में,
हिम्मत की फसल उगाती हैं।

इसलिए मत बैठो रोकर,
भाग्य को दोष लगाने में,
संकट खुद ही हटाने पड़ते हैं,
जीवन को सुंदर बनाने में।

डॉ बीएल सैनी
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान

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