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चाय

विधा:कविता
शीर्षक: खनकती चाय प्याली

खनकती चाय प्याली, सवेरे का मधुर गान,
धुएँ में घुलती खुशबू, जैसे जीवन का सम्मान।

चुस्की में छुपी बातें, यादों की मीठी डोर,
हर घूँट कहे कहानी, बीते पलों का शोर।

कभी सुकून की छाया, कभी मन का उत्साह,
चाय संग बैठा पल, बन जाता है परवाह।

अदरक की तीखी खुशबू, इलायची का एहसास,
हर घूँट में रचा बसा, अपनों का विश्वास।

खिड़की से झाँकती धूप, संग प्याली की तान,
मन के कोने-कोने में, भर दे नई उड़ान।

थके कदमों को मिलती, फिर से नई रवानी,
छोटी सी इस प्याली में, छुपी बड़ी कहानी।

खनकती चाय प्याली, जीवन का संगीत,
हर दिन को दे जाती, मुस्कान भरी प्रीत।


डाॅ सुमन मेहरोत्रा’ सुरभि’
मुजफ्फरपुर, बिहार

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